बीएसएनएलईयू-BSNLEU ने बीएसएनएल-BSNL के नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव-Non-Executive कर्मचारियों को आईडीए-IDA के बकाया भुगतान के लिए कदम उठाने के लिए सीएमडी, बीएसएनएल-CMD, BSNL को पत्र लिखा।
लंबे इंतजार के बाद डीपीई-DPE ने सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए आईडीए वृद्धि के लिए पत्र जारी किया है, जो 01.10.2020 से बढ़ा है । सभी जानते हैं कि बीएसएनएलयू की ओर से दायर रिट याचिका में माननीय केरल उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि आईडीए स्थगन बीएसएनएल के नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव - Non-Executive कर्मचारियों पर लागू नहीं है। बीएसएनएलईयू द्वारा प्राप्त इस न्यायालय के आदेश के परिणाम स्वरूप बीएसएनएल के नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव - Non-Executive कर्मचारियों को आईडीए का बकाया (arrears ) दिनांक 01.10.2020 से मिलेगा। तदनुसार, 5.5% आईडीए वृद्धि के लिए बकाया 01.10.2020 से भुगतान किया जाएगा। 01.01.2021 से आईडीए में 6.3% की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह 11.8 प्रतिशत आईडीए के बकाया(arrears) का भुगतान 01.01.2021 से किया जाएगा। चूंकि आईडीए का 01.04.2021 से 1.2% की कमी आई है, आईडीए का 10.6% का भुगतान 01.04.2021 से किया जाएगा। आईडीए के बकाया ( arrears ) का यह भुगतान बीएसएनएलयू की बड़ी उपलब्धि है। आज बीएसएनएलईयू-BSNLEU ने सीएमडी, बीएसएनएल-CMD, BSNL को पत्र लिखकर आईडीए के बकाया भुगतान ( payment of arrears ) के लिए बिना किसी देरी के कदम उठाने का अनुरोध किया है। BSNLEU का सीएचक्यू ( Central Head Quarter ) सभी नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव- Non-Executive कर्मचारियों को दिल से बधाई देता है जो बीएसएनएलईयू-BSNLEU के प्रयासों के कारण लाभान्वित होने जा रहे हैं ।
Com.S.Sivakumar,General Secretary of AIBSNLEA, retired on superannuation, after completing 38 years of exemplary and unblemished service. He retired as DGM- Finance in the BSNL Corporate Office. Com.S.Sivakumar has played a key role in strengthening the unity of the AUAB. BSNLEU wishes a very happy, healthy and peaceful retired life to Com.S.Sivakumar.
At the same time, it is disturbing to note that, the BSNL Management has not settled Com.S.Sivakumar's pension. He has been given only provisional pension. This action has been taken by the Management, under the pretext that, a show cause notice has been issued to Com.Sivakumar nearly 3 years ago, for his participation in the three day strike, that has taken place in February, 2019. This vindictive action of the BSNL Management is unwarranted and is highly deplorable. BSNLEU demands that, the Management should take necessary remedial action immediately and should settle the pension of Com.S.Sivakumar, GS, BSNLEU. We are hopeful that the AUAB will take necessary action to vacate this victimisation imposed on Com.S.Sivakumar.
*500 कार्यकर्ता, लेखक, वकील आदि भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखते हैं - पेगासस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की हैं।
पेगासस स्पायवेयर का इस्तेमाल कर कई महत्वपूर्ण राजनेताओं, कार्यकर्ताओं आदि के फोन हैक कर जासूसी की गई है। ज्ञात सूत्रों का कहना है कि पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल करते हुए एक फोन को हैक करने का खर्च 1.5 करोड़ रुपये आता है। फिर यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि बड़ी संख्या में व्यक्तियों के फोन पर जासूसी करने के लिए इतना बड़ा धन किसने खर्च किया है। विपक्ष ने सरकार पर पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल करके जासूसी करने का आरोप लगाया है, सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। सरकार ने न तो स्वीकार किया है और न ही इनकार किया है, कि उसने पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल जासूसी फोन के लिए किया था या नहीं। इन परिस्थितियों में 500 प्रख्यात कार्यकर्ताओं, लेखकों, वकीलों आदि ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर पेगासस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है।
The phones of many important political leaders, activists, etc., have been hacked and spied using the Pegasus spyware. Known sources say that, the cost for hacking one phone, using the Pegasus spyware, comes to Rs.1.5 crore. Then, a question arises naturally, who has spent such a huge money to snoop on the phones of a large number of persons. The opposition has accused the government for the spying, using the Pegasus spyware. On the other hand, the government maintains a silence. It has neither admitted nor denied, that it used the Pegasus spyware to snoop phones. Under these circumstances, 500 eminent activists, writers, lawyers, etc., have written to the Chief Justice of India and have demanded action on the Pegasus issue.
चेन्नई सर्कल कौंसिल- चेन्नई सर्कल प्रशासन से कुछ सवाल।
BSNLEU CHQ-बीएसएनएलईयु सीएचक्यु वेबसाइट को अपडेट करने का और यह संदेश प्रसारित करने के पीछे हमारा इरादा किसी ऐसे व्यक्ति को कोई जवाब नहीं देना है, जो मानसिक रूप से बीमार है और जो अपने ही संगठन के नेताओं के चेहरों पर भी थूकने में और अन्य लोगों के मानसिक उत्पीड़न से खुशी पाता है । हमारा इरादा केवल चेन्नई सर्कल की भूमिका के बारे में कुछ सवाल उठाने का है।
- नेशनल कौंसिल सहित देश भर में सभी सर्कल और लोकल कौंसिल में केवल कर्मचारी पक्ष-Staff Side का सचिव ही कौंसिल मीटिंग में चर्चा के लिए एजेंडा आइटम प्रस्तुत कर सकते हैं । यह नियम है। क्या चेन्नई सर्कल में यह नियम अमान्य हो गया है ?
- चेन्नई सर्कल में एनएनएफटीई-NFTE BSNL के सर्कल सेक्रेटरी अपने अहंकार की समस्या के कारण स्टाफ साइड सेक्रेटरी को आइटम प्रस्तुत करने देना नहीं चाहते हैं। क्या चेन्नई सर्कल प्रशासन यह कार्रवाई को मंजूरी देता है ?
- एनएफटीई-बीएसएनएल - NFTE BSNL के सर्किल सेक्रेटरी ने स्टाफ साइड सेक्रेटरी को कोई अजेंडा आइटम जमा नहीं किया था इसलिए बीएसएनएलईयु-BSNLEU ने अपनी ओर से अजेंडा आइटम सर्किल एडमिनिस्ट्रेशन को भेज दिया था । इसमें गलत क्या है ?
- स्टाफ साइड सेक्रेटरी को अपना एजेंडा आइटम जमा किए बिना एनएफटीई बीएसएनएल-NFTE BSNL सर्कल सचिव के पास स्टाफ साइड मीटिंग आयोजित करने की मांग करने का क्या अधिकार है? चेन्नई सर्कल प्रशासन इस मांग को कैसे मान्य करता है?
- स्टाफ साइड सेक्रेटरी द्वारा प्रस्तुत बीएसएनएलईयु - BSNLEU के एजेंडा आइटम को प्रशासन ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया है कि उनके पास स्टाफ पक्ष की सर्वसम्मति नहीं थी । हम जानना चाहते हैं कि चेन्नई सर्किल प्रशासन ने किस नियम के तहत ऐसा कदम उठाया है ?
मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी का कार्यान्वयन - BSNLEU की एक और उपलब्धि।
दिनांक 15.05.2021 को बीएसएनएलईयू-BSNLEU ने प्रबंधन को पत्र लिखकर इच्छुक कर्मचारियों के लिए चिकित्सा बीमा योजना-Medical Insurance पॉलिसी लागु करने की मांग की थी । बीएसएनएलईयू-BSNLEU ने निदेशक (एचआर)- Director (HR) से इस मामले पर चर्चा की। इसके बाद प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई की और आज कोर्पोरेट कार्यालय-Corporate Office ने बीएसएनएल-BSNL कर्मचारियों के लिए चिकित्सा बीमा योजना-Medical Insurance Policy लागू करने के लिए पत्र जारी किया है। इस योजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं :
- यह योजना को बीएसएनएल कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी - २०२१ - BSNL Employees Insurance पॉलिसी-2021 कहा जाएगा। यह योजना दिनांक 01.09.2021 से चालू हो जाएगी ।
- नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव-Non-Executive कर्मियों के लिए पॉलिसी राशि - कर्मचारी, पति या पत्नी और 3 बच्चों से मिलकर एक परिवार के लिए 5 लाख रुपये है।
- प्रीमियम राशि-Premium Amount 6100 रुपये + 18% जीएसटी-GST. मिलाकर रु. 7,198 होगा ।
- माता या पिता को शामिल करने के बाद प्रीमियम - Premium 9,000 रुपये है और माता-पिता दोनो को सामिल करने के लिए प्रीमियम-Premium 9,600 रुपये है। इसी तरह सास-ससूर को भी शामिल किया जा सकता है।
- इच्छुक नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव-Willing Non-executive कर्मचारी 10 लाख रुपये तक की अपनी पॉलिसी राशि को टॉप-अप कर सकते हैं ।
- ई5-E5 वेतनमान में अधिकारियों के लिए पॉलिसी- policy राशि 10 लाख रुपये है।
- यह मेडिकल इंश्योरेंस - Medical Insurance मौजूदा बीएसएनएल एमआरएस ( BSNL MRS ) के अतिरिक्त होगा।
बीएसएनएलईयू-BSNLEU ने इस मामले पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए निदेशक (मानव संसाधन) - Director, HR और श्री ए.एम. गुप्ता, सीनियर जनरल मेनेजर(ऐड्मिन)-Senior General Manager (Admin) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को हार्दिक धन्यवाद दिया।
BSNLEU ने सीएमडी बीएसएनएल के साथ ठेका कर्मियों के मुद्दों पर चर्चा की ।
साथी अनिमेष मित्रा, अध्यक्ष और साथी पी. अभिमन्यु, जनरल सेक्रेटरी ने दिनांक 28.07.2021 के दिन BSNL के सीएमडी श्री पीके पुरवार से मुलाकात की और ठेका कर्मियों की समस्याओं के बारे में चर्चा की। बीएसएनएल सीसीडब्ल्यूएफ (बीएसएनएल कैजुअल कांट्रेक्ट वर्कर्स फेडरेशन)-BSNLCCWF के महासचिव साथी अनिमेश मित्रा ने ठेका कर्मियों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष साथी अनिमेष मित्रा और साथी पी. अभिमन्यु, जनरल सेक्रेटरी द्वारा व्यक्त किए गए विचार इस प्रकार हैं :
- क्लस्टर आधारित आउटसोर्सिंग प्रणाली विफल है, क्योंकि व्यय दोगुना हो गया है और आंकड़ों के अनुसार लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड लाइन भारी संख्या में बंद हो रहे है ।
- जहां भी ठेका कर्मी उपलब्ध हो वहाँ प्रबंधन द्वारा ठेका कर्मियों को पुन:नियुक्त करने पर विचार करना चाहिए ।
- ठेका कर्मियों के वेतन का भुगतान 12 से 15 माह तक नहीं किया जाता है। वेतन बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए ।
सीएमडी, बीएसएनएल ने नेताओं के विचारों का जवाब देते हुए कहा कि विभिन्न मापदंडों से पता चलता है कि आउटसोर्सिंग के बाद लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड सेवाओं की कार्यकुशलता में काफी सुधार हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि आउटसोर्सिंग प्रणाली की कमियों को दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। नेताओं ने सीएमडी बीएसएनएल द्वारा दिए गए आंकड़ों को नोट कर बताया है कि उसका सत्यापन किया जाएगा और उसके बाद जवाब दिया जाएगा।
Our intention of making this website updating is not to give any reply to a person, who is mentally sick and who finds sadistic pleasure in spitting even on the faces of the leaders of his own union. Our intention is only to raise certain questions about the role of the Chennai Circle Administration.
(1) In all the Circle and Local councils throughout the country, including in the National Council, it is only the Staff Side Secretary who can submit agenda items for discussion in the Council meetings. This is the Rule. Whether this Rule has become invalid in Chennai Circle?
(2) In Chennai Circle, the NFTE Circle Secretary, due to his ego problem, does not want to submit items to the Staff Side Secretary. Does the Chennai Circle Administration approves his action?
(3) Since the NFTE Circle Secretary did not submit any item to the Staff Side Secretary, the items of BSNLEU alone were sent to the Circle Administration. What is wrong in this?
(4) Without submitting his agenda items to the Staff Side Secretary, what right does the NFTE Circle Secretary have, to demand the holding of the Staff Side meeting? How the Chennai Circle Administration validates this demand?
(5) The agenda items of BSNLEU, submitted by the Staff Side Secretary, have been rejected by the Administration, stating that they did not have the consensus of the Staff Side. We want to know, under which Rule the Chennai Circle Administration has taken such a step?
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