17 - Sep - 2020

Hindi translation of "Working class stabbed on the back - working hours increased from 8 hours a day to 12 hours a day."

वर्किंग क्लास के साथ विश्वासघात- कार्य के घंटे, 8 घंटे प्रतिदिन से बढ़ा कर 12 घंटे प्रतिदिन किए गए....
अपना खून न्यौछावर कर और अत्याधिक बलिदान कर, वर्किंग क्लास ने "8 घंटे के कार्य दिवस" के लक्ष्य को हासिल किया था। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने, 1919 में आयोजित अपने सम्मेलन में एक दिन में 8 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे कार्य की घोषणा की थी। ILO सम्मेलन के इस निर्णय का 1921 में भारत सरकार द्वारा समर्थन किया गया था।

अब, जबकि, इस वक्त भारत लॉक डाउन के दौर से गुजर रहा है, चुपके से, कार्य के घंटे, 8 घंटे प्रतिदिन से बढ़ा कर 12 घंटे प्रतिदिन किए जा चुके हैं। वास्तव में, मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से ही, फैक्ट्रीज एक्ट 1948 में परिवर्तन हेतु गंभीर रूप से प्रयासरत रही है, जिससे कि, कार्य के घंटों में वृद्धि की जा सके। बहरहाल, इसे रोकने के लिए सेंट्रल ट्रेड यूनियन्स द्वारा कई हड़तालें भी की गई है। हाल ही में, 13 अप्रैल, 2020 को उनके द्वारा कार्य के घंटो में वृद्धि के विरोध में केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र भी लिखा गया है।

इसी दौरान, CII (कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज) का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत के कॉर्पोरेट्स आदि के द्वारा भी कार्य के घंटों में वृद्धि हेतु सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। परिणामस्वरूप, सेंट्रल ट्रेड यूनियन्स के प्रतिरोध के बावजूद, कई राज्य सरकारों द्वारा मोदी सरकार के मौन समर्थन से चुपचाप तरीके से कार्य के घंटे, 8 घंटे से बढ़ा कर 12 घंटे कर दिए गए हैं। इन राज्यों में, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश व ओडिशा शामिल है।

कई और राज्यों द्वारा भी इसे शीघ्र लागू करने की संभावना है। केंद्र और राज्य सरकारें, आज देश मे व्याप्त असामान्य स्थिति का लाभ उठाते हुए, वर्किंग क्लास की पीठ में छुरा भोंक कर, कॉर्पोरेट क्लास को सहयोग कर रही है। अब, भारत के वर्किंग क्लास को, "8 घंटे के कार्य दिवस" के, संघर्षों से अर्जित अपने अधिकार की पुनर्बहाली के लिए, जवाबी कार्यवाही करना चाहिए।