17 - Sep - 2020

Hindi translation of "Sabarimala - Supreme Court judgement is being violated by the BJP for political gains".

सबरीमाला: राजनीतिक लाभ के लिए बीजेपी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन किया जा रहा है

 

हमने कई बार देखा है कि जब वर्किंग क्लास के हड़ताल पर जाने के बाद , न्यायालय, कई उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय  ने हस्तक्षेप किया है और हड़ताल वापसी के आदेश दिए हैं। आदेश का पालन करते हुए ट्रेड यूनियन्स ने संघर्ष को विराम दिया है। पर अब हम देख रहे हैं कि सबरीमाला पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। सितंबर में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया था कि अब 10 से 50 आयु वर्ग में आने वाली महिलाएं भी सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सकती है। लेकिन, तुरंत बाद ही, कुछ लोगों द्वारा इस निर्णय को " हिन्दू धर्म और भगवान अय्यपा के अपमान " के रूप में प्रस्तुत किया गया। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था के मसलों में न्यायालयों का हस्तक्षेप नही होना चाहिए।

 

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद 10 से 50 आयु वर्ग की कई महिलाएं , जो सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास कर रही थी, को परेशान किया गया, उनके साथ बदसलूकी की गई और उनको पीट कर भगा दिया गया। जैसे तैसे जब दो महिलाएं मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंच गई तो मुख्य पुजारी, कंडारारु राजीवरु, ने मंदिर को बंद करने की धमकी दी। किन्तु अब यह साबित हो गया है कि सबरीमाला में विरोध सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया जा रहा है।

 

केरल के बीजेपी अध्यक्ष, श्रीधरन पिल्लई,  कैमरा के सामने यह शेखी बघारते हुए पकड़े गए हैं कि किस तरह बीजेपी द्वारा सबरीमाला आंदोलन किया जा रहा है। वे वीडियो में यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि सबरीमाला के मुख्य पुजारी माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के भय से चिंतित थे और इस संबंध में उन्होंने उनसे संपर्क किया था। बीजेपी अध्यक्ष ने मुख्य पुजारी से जो कहा वह बयान निम्नानुसार है।

 

" मैंने उनसे कहा कि वें अकेले नही है। यह न्यायालय की अवमानना नही होगी। यदि अवमानना का प्रकरण दर्ज होता है तो वह सबसे पहले हमारे खिलाफ होगा। आपके साथ हजारों लोग होंगे। जब मैंने उनसे कहा कि वें अपने आपको अकेला न समझे, बस यह एक शब्द ही उनके लिए काफी था। और उस दिन उन्होंने कड़ा निर्णय लिया। यह वह निर्णय था जिसकी वजह से राज्य सरकार और पुलिस को पीछे हटना पड़ा।" यह सब बीजेपी अध्यक्ष वीडियो में अपने कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं। वे वीडियो में यह भी कहते हैं कि " सबरीमाला का मुद्दा हमारे लिए एक स्वर्णिम अवसर है।"

 

अब यह शीशे की तरह साफ है कि सबरीमाला आंदोलन राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए बीजेपी के द्वारा आयोजित किया हुआ है। राजनीतिक लाभ के लिए हिंदुओं की भावनाओं का दोहन किया जा रहा है। प्रजातंत्र का मूल सिद्धान्त है " न्याय के समक्ष सब समान है और न्याय से ऊपर कोई नही है।" 

 

अब जबकि देश के कानून का वह पार्टी उल्लंघन कर रही जो केंद्र में सत्तासीन है, देखना यह है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय क्या कदम उठाएगा। जो न्यायालय, प्रायः वर्किंग क्लास के खिलाफ काफी सख्ती से पेश आते हैं, उन्हें अब देश के कानून के सम्मान की खातिर वैसी ही सख्ती बरतनी चाहिए।

( सौजन्य: ND TV)