17 - Sep - 2020

Hindi translation of "March to Sanchar Bhawan and misleadings by mischief mongers."

 

मार्च टू संचार भवन और दुष्प्रचारकों का भ्रामक प्रचार...
AUAB द्वारा 05.04.2019 को मार्च टू संचार भवन आयोजित किया जा रहा है। ऐसी विकट स्थिति में भी कुछ दुष्प्रचारक कर्मचारियों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। वें यह सवाल कर रहे हैं कि जब आचार संहिता लागू हो चुकी है, दिल्ली में मार्च आयोजित करने का क्या औचित्य है ? यह सही है कि आचार संहिता लागू होने के पश्चात सरकार किसी भी प्रकार का नीतिगत निर्णय नही ले सकती है। किंतु, इसके साथ ही यह भी सच है कि अभी बीएसएनएल के वित्तीय रिवाइवल के लिए DoT को काफी प्रक्रियाएं पूर्ण करनी है, जो आचार संहिता के चलते भी की जा सकती है। उदाहरण के लिए , सरकार के नियम अनुसार पेंशन कॉन्ट्रिब्यूशन के भुगतान के क्रियान्वयन में आचार संहिता की बाधा नही रहेगी। यह केवल सरकार के पूर्व से अमल में लाए जा रहे नियम का बीएसएनएल में क्रियान्वयन मात्र होगा। इसी प्रकार से, बीएसएनएल द्वारा प्रस्तुत भूमि प्रबंधन नीति (Land Management Policy) का DoT द्वारा अनुमोदन आचार संहिता के लागू रहते भी किया जा सकता है। इससे बीएसएनएल को अपनी रिक्त जमीनों को मोनेटाइज करने और उससे भारी राजस्व अर्जित करने में तत्काल सहायता मिलेगी। बीएसएनएल को अपने ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर के लिए बैंक लोन की अनुमति भी एक अहम मुद्दा है और इस पर भी आचार संहिता का प्रभाव नही होगा। और तो और, 3rd पे रिवीजन के मुद्दे पर भी DoT द्वारा काफी सारी पूर्व कार्यवाही (groundwork) की जानी चाहिए, जिससे कि लोकसभा चुनाव के तुरंत पश्चात नई सरकार को अंतिम निर्णय लेने में आसानी हो सके। और DoT द्वारा यह सब कुछ क्यों नही किया जा रहा है, यह एक अहम प्रश्न है। यह केवल DoT की बीएसएनएल विरोधी सोच की वजह से नही किया जा रहा है। इसीलिए, इस वक्त मार्च टू संचार भवन बेहद जरूरी है।