Hindi translation of "Good bye 2020, welcome 2021."
अलविदा 2020, स्वागतम 2021 .... !
वर्ष 2020 खत्म होने जा रहा है। किंतु इसे मानवता के इतिहास में एक स्याह (black) वर्ष के रूप में याद किया जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस वर्ष, सम्पूर्ण विश्व भयावह कोरोना वायरस की बीमारी से त्रस्त रहा। 8 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हुए। 18 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिसमें अधिकांश कार्यरत थे। दुनिया अभी भी इस वायरस की गिरफ्त से बाहर नही हुई है। बहरहाल, कई वैक्सीन्स मार्किट में आने की शीघ्र संभावना है। इस पृष्ठभूमि में, दुनिया नववर्ष में प्रवेश करने जा रही है। वर्ष 2020 भले ही चला जाए, किन्तु, उसके द्वारा प्रदत्त अनुभव बरकरार रहेंगे। वे हैं :-
- सुपर पॉवर अमेरिका, जिसके पास दुनिया को कई बार नष्टप्राय करने के लिए कई परिष्कृत (sophiscated) हथियार है, कोरोना वायरस को मात नही दे सका है। यह भी एक विडंबना ही है कि, विश्व में अमेरिका कोविड 19 का सबसे बड़ा शिकार बना है।
- अमेरिका और अन्य पाश्चात्य देश, जो कि विश्व में बेहद सम्पन्न और आधुनिक राष्ट्र माने जाते हैं, कोरोना वायरस के सर्वाधिक शिकार हुए हैं। इसकी वजह, इन देशों में स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण निजीकरण होना है।
- दूसरी ओर, चीन, क्यूबा और वियतनाम जैसे समाजवादी देश अपने नागरिकों की सुरक्षा करने में सफल रहे हैं। इन देशों में लोगों की मृत्यु भी कम हुई है। समाजवादी व्यवस्था, पूंजीवादी व्यवस्था की तुलना में बेहतर साबित हुई है।
- विश्वभर में कार्यरत लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वहीं, कॉर्पोरेट्स ने अपनी संपदा में, कोविड 19 महामारी की स्थिति में भी, उल्लेखनीय वृद्धि की है। ऐसा केवल पूंजीवादी देशों की कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों की वजह से ही हो सका है।
- भारत में, 14 करोड़ प्रवासी वर्कर्स नौकरी और आश्रय विहीन हो गए और सड़क पर ला दिए गए। किन्तु, इस दौरान ही, अडानी और अम्बानी जैसे कॉर्पोरेट्स की संपत्ति कई गुना बढ़ गई। इस समयावधि में ही, मुकेश अम्बानी विश्व के 5वें अमीर व्यक्ति बने।
- भारत में, "निजीकरण", मोदी सरकार का "मूलमंत्र" हो गया है। स्वास्थ्य सेवाएं, रेल्वे, बैंक, बिजली, टेलीकॉम और बीमा जैसे विभिन्न जनोपयोगी क्षेत्र निजी क्षेत्र को सौंपे जा रहे हैं। लेकिन हमें यह नही भूलना चाहिए कि कोविड 19 से लोगों की सुरक्षा में सरकार द्वारा संचालित हॉस्पिटल्स ने ही अहम भूमिका निभाई है। धन की लालसा में लिप्त कॉर्पोरेट हॉस्पिटल्स अभी तक इस परिदृश्य में कहीं भी नजर नही आए हैं।
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