17 - Sep - 2020

Hindi translation of "Corona Virus Disease - What the Naredra Modi government says and practices."

कोरोना वायरस की बीमारी  - नरेंद्र मोदी सरकार क्या कहती है और करती क्या है ( कथनी और करनी में फर्क ) 

 कोरोना वायरस रोग भारत में तेजी से फैल रहा है।  पिछले 24 घंटों में, देश में 2,000 लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी ।  प्रभावित लोगों की संख्या पहले ही 3.5 लाख तक पहुंच गई है।  अब, भारत दुनिया में चौथा सबसे  प्रभावित देश है, जो केवल अमेरिका, ब्राजील और रूस के बाद आता है।

 

 हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद की तारीफ करते थकते नहीं हैं।  वह कहते हैं, कोरोना वायरस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों के लिए पूरी दुनिया भारत देश की सराहना की है।  लेकिन, क्या यह सच है?

 

भारत में कोरोना वायरस बीमारी का पहिला मरीज 30 जनवरी, 2020 को केरल मिला।  तुरंत, केरल सरकार हरकत में सामने आई। और  इस सरकार ने बीमारी से लड़ने के लिए 20,000 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र आंबटित कि।  यहां तक ​​कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस रोग से लड़ने के लिए केरल सरकार द्वारा उठाए गए अहम कदमों की काफी सराहना की।

 

जबकि, 24 फरवरी तक, प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदीजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़े पैमाने पर स्वागत समारोह आयोजित करने में मशगुल रहे थे।  ऐसे समय में जब कोरोना वायरस रोग तेजी से देश भर में फैलने लगा था, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में लाखों लोगों को “नमस्ते ट्रम्प” कहलवाने में जुटे रहे।  इस तरह श्री नरेंद्र मोदी सरकार उस समय कोरोना वायरस के रोग से लड़ने की रणनीति रही थी।

 

लॉकडाउन की घोषणा से पहले, केंद्र सरकार द्वारा सभी प्रवासी श्रमिकों के लिए कोई पूर्व नियोजन नहीं किया गया था।  इसलिए, लॉकडाउन के बाद, लगभग 10 करोड़ प्रवासी श्रमिकों/मजदूरों को नौकरी, भोजन या आश्रय के बिना उनके कठिन  हालात पर छोड़ दिया गया था।  उन्हें भुखमरी और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।  इसलिए, वे अपने अपने मूल गांव/ स्थानों पर जाने के लिए सैकड़ो/हजारों किलोमीटर  चलते रहे।  कई लोगो की तो रास्ते में दर्दनाक मौत हो गयी।  इस प्रकार, श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रवासी कामगारों/मजदूरों के हितों की अनदेखी करते हुए उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय किया।

 

कोरोना वायरस रोग से लड़ने के लिए मोदी सरकार द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज एक फरेब है  या कहे तो एक बड़ा झूठ ।  यह केवल बजट में पहले से घोषित अनेक योजनाओं को एकत्रित करके उसे बड़ा चढ़ा कर पेश करने का एक अपप्रचार था।  कोरोना वायरस रोग से लड़ने के लिए मोदी सरकार ने जो रुपये खर्च किये है वह इस वैश्विक महामारी को देखते हुए बहुत ही कम है।

 

लॉकडाउन के प्रतिबंधों का उपयोग करते हुए, श्री नरेंद्र मोदी सरकार ने श्रमिक/मजदूर वर्ग पर काफी गलत ढंग से गंभीर हमले किए हैं।  "8 घंटे के कार्य दिवस" ​​यह लड़ कर हासिल किया गया हमारा अधिकार को भी छीना गया ।  पूंजीपतियों को अधिक फायदा पहुंचाने के होड़ में दिन में काम के घंटे को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिये गए।  श्री नरेन्द्र मोदी सरकार के गलत इशारे पर, राज्य सरकारों द्वारा श्रम कानूनों को "निलंबित" रखा जा रहा है।  केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनरों का मंहगाई भत्ता डेढ़ साल के लिए ठंडे बस्ते डाल दिया गया है।

 

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी "आत्मनिर्भर भारत" बनाना चाहते हैं।  लेकिन, वह भारतीय रेलवे, एयर इंडिया, रक्षा उत्पादन कारखानों, कोयला, बैंकिंग और बीमा कंपनियों, आदि क्षेत्रो में 100% विदेशी निवेश की अनुमति देकर, सभी भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बेच रहे है। जल्द ही, विदेशी कंपनियां उपरोक्त सभी उद्योग को संभालेंगी।  इस प्रकार से श्री  नरेंद्र मोदीजी एक "आत्मनिर्भर भारत " का निर्माण करना चाहते हैं।