Hindi translate of "If coal workers and trade unions can achieve, why can’t BSNL employees and the unions / associations?"
यदि कोल् वर्कर्स और उनकी ट्रेड यूनियन्स हासिल कर सकती है तो फिर BSNL कर्मी और यूनियन्स/ एसोसिएशन्स क्यों नही ?
मोदी सरकार ने सम्पूर्ण पब्लिक सेक्टर, भारतीय रेल, डिफेंस प्रोडक्शन फैक्टरीज, पेट्रोलियम (BPCL), इलेक्ट्रिसिटी, बैंकिंग, LIC वगैरह वगैरह के निजीकरण का जबरदस्त अभियान शुरू किया है।
कोयला खदानों के संबंध में मोदी सरकार ने निर्णय लिया था कि देश भर में 41 कोल् ब्लॉक्स भारतीय और विदेशी कॉर्पोरेट्स को सौंप दिए जाएं। कोल् सेक्टर की सभी ट्रेड यूनियन्स ने निजीकरण का विरोध किया। उन्होंने,आम लोगों के बीच इस निजीकरण के संबंध में व्यापक अभियान चलाया। तत्पश्चात, सभी कोयला कर्मी 2 से 4 जुलाई, 2020 तक 3 दिन की हड़ताल पर चले गए। हड़ताल पूर्ण रूप से सफल हुई।
कोयला कर्मियों की इस आक्रामक हड़ताल के परिणाम स्वरूप अब सरकार को कोयला खदानों का निजीकरण करना काफी कठिन हो गया है। दो बार, सरकार ने 41 कोल ब्लॉक्स की नीलामी हेतु सूचना जारी की। किन्तु, इस नीलामी में शामिल होने के लिए कोई भी आगे नही आया। अतः, सरकार ने नीलामी प्रक्रिया को अक्टूबर/नवंबर 2020 तक आगे बढ़ाया है। कोल सेक्टर की ट्रेड यूनियन्स का भी नवंबर में हड़ताल पर जाना प्रस्तावित है।
यदि कोल् वर्कर्स और उनकी ट्रेड यूनियन्स निजीकरण रोकने के लिए लड़ सकती है तो फिर 4G सेवा तत्काल शुरू करने और BSNL को बीमार PSU बनने से बचाने के लिए BSNL कर्मी और यूनियन्स/ एसोसिएशन्स क्यों नही लड़ सकते हैं ?
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